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दुनिया की सबसे महंगी तिजोरी और सब से कड़ी सुरक्षा में दुनिया के सभी बीज कैद है नार्वे के इस स्वालबोर्ड बीज बैंक में

    


कयामत की तैयारी: स्वाल्बार्ड ग्लोबल बीज बैंक 
आजकल किराने की दुकान से अनाज एकदम साफसुथरा मिल रहा है । ना कोइ कंकड, ना कोइ घासफुस का टुकडा और ना धुल । बिलकुल साफ ! अनाज साफ करनेवाले छलनी और सुंपडों की भी जरूरत नही रही ।
लेकिन क्या ये हकिकत में साफ है?
बाहर से देखने में तो साफ है लेकिन अंदर से साफ नही, शुध्ध नही । अनाज के हाईब्रिड बीजों में मोन्सेन्टो नाम के सर्प का ‘जीएमओ’( genetically modified organism ) प्रकार का जहर, सरकार की गद्दारी, लालच और किसान की मजबूरियां घुले हुए हैं ।
असली बीज क्या खत्म हो गए? 
 https://youtu.be/Otc1TgUV4bc
नही । बीजबेन्क के वोल्ट में नयी दुनिया के लिए संभालकर रख्खे हैं । लोगों के गले उतरे उस हिसाब से बात करें तो सिस्टम को हमेशा एक बात का डर रहता है कि कहीं धरती पर कोइ प्रलय, महायुध्ध जैसी आपदा आ सकती है, खेती में उपयोगी अनाज, फल और अन्य पौधों की जातियां बीज सहित पूरी नष्ट हो सकती हैं । प्रलय से बचे लोग के लिए बीजों को बचाना जरूरी है । दुनिया के लगभग हर देश में बीजों की रखवाली करते केन्द्र है या थे । उन सब का अब केन्द्रिकरण हो गया है । अन्य देशों को अब बीज को बचाने की जरूरत नही है । बीजों की यह केन्द्रिय बीजबेन्क भारत से करीब ६ हजार कि.मि. उत्तर में और नोर्थ पोल से १३०० कि.मि. दूर नोर्वे के एक टापू पर २००८ में बना है ।
नाम है स्वालबार्ड ग्लोबल बीज बैंक, नॉर्वे और उत्तरी ध्रुव के बीच स्वालबार्ड द्वीपसमूह में एक दूरदराज के द्वीप पर माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तापमान वाली जगह में एक कंक्रीट से बनी इमारत में बनी है, जो दुनिया की कृषि का भविष्य और भाग्य का तय करेगी ।
पशु पक्षी की प्रजातियां लुप्त होती है तो सारी दुनिया का ध्यान उस पर जाता है, लेकिन सदियों से मानव जीसे खाता आया है वो अनाज, फल और दवाई के पौधों का जीवन खतरे में है किसी को नही पता । एक अध्ययन से पता चला है कि 1903 में अमेरिका में 8,000 से अधिक किस्मों की फसल की पैदावार होती थी, 1983 तक केवल 600 ही किस्में बची थी । फसल के बीजों की रक्षा के लिए खडी की है यह बीज बेन्क ।

दुनिया भर की बीजबेन्क से उनके संग्रह के सारे सेम्पल इस रिमोट बैंक में आ चुके हैं और वो सभी विविध बहाने से बंद हो रही है । किसी देश में लापरवाही कारण बनी, किसी देश को रखवाली का खर्च भारी पड रहा है तो कोइ बारीश और बाढ में बीजबेन्क का तबाह होने का कारण बता देते हैं । इस रिमोट बीजबेन्क में दुनिया भर के 860,000 बीज के नमूनों को इकट्ठा किया है ।
यहां से आगेकी बात लगे नही उतरेगी । जीनका गला या हाजमा खराब हो वो आगे ना पढे । सीरिया के युद्ध में मिली नाकामी का डंख, रसिया, इरान और उत्तर कोरिया के ताजे मोरचे के बाद, बनते बिगडते समिकरणो से इस सीड बैंक के पीछे रहे असली इरादों का मतलब समज मे आ जाना चाहिए, "जितना संभव हो, दुनिया की असली फसल की विविधता को बराबर संभाल कर रखे लें" । लेकिन किसके लिए? एक तरफ तो असली बीज संभालने हैं तो दुसरी तरफ उत्पादकता बढाने के नाम पर असली बीज को नष्टकर नकली और जहरिले बीज बनाते जा रहे हैं । असली बीजों को संभालनेवाले लोग ही दुनिया भर में बीज की आपूर्ति को उनके कुछ पालतु निगमों द्वारा अपने एकाधिकार में लेते जा रहे हैं, और स्वदेशी, हजारों वर्षों से बोए जाते असली बीजों को आनुवंशिक रूप से संशोधित संस्करणों से मिटाए जा रहे हैं ।

बीजों को संभालने और बीगाडने के कामों में धन लगाया है ‘बिल गेट और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’, ‘रॉकफेलर फाउंडेशन’, ‘मोनसेंटो’, ‘सिएनजेंटा’ और अन्य बायोटेक हितों के दलालोंने । इन निवेशकों ने ऐसे ऐसे नियम कानून बनाए है कि इस 'बीज बचत खाते' से आम किसान तक बीज ना जा सके, जीन किसानो से बीज छुडा लिए हैं तो उनके पास वापस भेजने में समजदारी नही लगती है । बीज पर संशोधन करती सरकारी या गैरसरकारी संस्था को ही सेम्पल मिल सकते हैं । गुजरात के आणंद शहर में खेती के संशोधन के लिए दो बडे बडे सरकारी खेत है । मित्र को अपने खेत के लिए कुछ पौधे के रोपा चाहिए था । एक खेत में गए तो मजदूर लेवल के कर्मचारी ही मिले, साहब नही आए थे । उनके पास कोइ ऑथोरिटी नही थी । फीर हमने मात्र देखने और खेत में घुमने की बात कही तो खेत में सांप का उपद्रव है, बाहर के लोगों को अंदर नही जाना चाहिए ऐसा बोल कर रोक दिया और थोडे दूर रहे बडे खेत पर जाने की सलाह दी । हम बडे हाईटेक खेत गए, गॅट खूला था और हम अंदर घुस गये । दो कमांडो जैसे गार्ड कहीं से आ गये, उनके हाथ में बंदूकें थी या नही अभी याद नही रहा । परमीशन, अपोइन्टमेन्ट, चिठ्ठी आदी मांगने लगे। हमारे पास कुछ नही था, पौधों के रोप के लिए परमीशन की जरूरत होती है पता ही नही था । दुनिया में कहीं भी कितना बडा किसान या जमीनदार हो उससे मिलने के लिए अपोइन्टमेन्ट की जरूरत नही पडती है । इन सरकारी किसानोको जरूरत पडती है । असली बीज असली किसान तक नही जाने चाहिए, बील गेट का ये नियम भारत में तो लागू नही हो गय
यह फसल लायब्रेरी शून्य से नीचे तापमान वाले इलाके में है । जिन्दा बीजों को लंबे समय के लिए जिन्दा रखने के लिए उसे नीचा तापमान पर सुलाना पडता है । सालों तक बीज सोया रहता है मरता नही है । फ्रीजर, बीजली का खर्च बचाने के लिए ये जगह पसंद की होगी ।
जीव आखिर जीव है कितना भी करो अगर लिमिट से अधिक समय गया तो बीज मर सकते हैं । ना मरे तो भी मानव मन मानता नही, रखवालों को ही आशंका रहती है कि कुछ साल में बीज मर गए तो?
उनकी आशंकाओं से हमे भी एक आशंका होती है कि मैने बचपन में जो असली अनाज खाया था वो आज भी दुनिया के किसी कोने में खूफिया या प्रतिबंधित खेतों में उगाया जाता है । और बीज बेन्क को फ्रेश बीजों की सप्लाय हो जाती है । क्या बील गेट एन्ड कंपनी को पता नही कि हम आम जनता को जहर खिला रहे हैं ! जहर खिलानेवालों को पता ही होता है इसलिए खूद नही खाते होन्गे । असली अनाज, सब्जी और फलफूल उगाते खेत उनके वीआईपी परिवारों के लिए तो हैं । भारत के वीआपी और नेतालोग हम खाते हैं वही खाते होंगे या उनके लिए भी अलग और असली राशन की व्यवस्था है?
दुनिया के कृषिबीज खूद धनमाफिया और उनकी बनायी नयी दुनिया के लिए हैं । इस दुनिया को तो खतम करना है, कृत्रिम कयामत ढा कर, नस्लों को आपस में लडाकर, देशों को लडाकर, कृत्रिम रोग फैलाकर, नकली दवा पिलाकर, नपुंसकता बढाकर और नकली खाना खिलाकर । मानव आबादी को निपटाने वाले किसी भी उपाय में वनस्पति खतम हो जाए ऐसी बात ही नही है । बस, असली खूराक इस आबादी को नही खाने देना है । एक बार डिपोप्युलेशन का झाडू फिर जाए तब बाकी बचे लोगों को देख लेन्गे

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