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हमारे शरीर के अंदर 72000  नाडिया  होती है , जिनमे  3  मुख्य होती है -   इड़ा ,पिंगला और सुषुम्ना !‘नाड़ी’ का मतलब धमनी या नस नहीं है। नाड़ियां शरीर में उस मार्ग या माध्यम की तरह होती हैं जिनसे प्राण का संचार होता है, शरीर के ऊर्जा‌-कोष में, जिसे प्राणमयकोष कहा जाता है ! शरीर के ऊर्जा‌-कोष में, जिसे प्राणमयकोष कहा जाता है, 72,000 नाड़ियां होती हैं। ये 72,000 नाड़ियां तीन मुख्य नाड़ियों- बाईं, दाहिनी और मध्य यानी इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना से निकलती हैं। इन 72,000 नाड़ियों का कोई भौतिक रूप नहीं होता। यानी अगर आप शरीर को काट कर इन्हें देखने की कोशिश करें तो आप उन्हें नहीं खोज सकते। लेकिन जैसे-जैसे आप अधिक सजग होते हैं, आप देख सकते हैं कि ऊर्जा की गति अनियमित नहीं है, वह तय रास्तों से गुजर रही है। प्राण या ऊर्जा 72,000 अलग-अलग रास्तों से होकर गुजरती है। प्रकृति के कुछ गुणों को पुरुषोचित माना गया है और कुछ अन्य गुणों को स्त्रियोचित। आप भले ही पुरुष हों, लेकिन यदि आपकी इड़ा नाड़ी अधिक सक्रिय है, तो आपके अंदर स्त्रियोचित गुण हावी हो सकते हैं। आप भले ही स्त्री हों, मगर यद...

डाईब्टीज से भी ज्यादा खराब है side effect इसके

भारत में 5 करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोगों को डाइबटीज है और 3 करोड़ से ज्यादा  को हो जाएगी अगले कुछ सालों में (सरकार ऐसा कह रही है ) , हर 2 मिनट में एक आदमी डाइबटीज से मर जाता हैं !  और complications बहुत है !   किसी की किडनी खराब हो रही है ,किसी का लीवर खराब हो रहा है , किसी को paralisis हो रहा है किसी को brain stroke हो रहा है ,किसी को heart attack आ रहा है ! कुल मिलकर complications  बहुत है diabetes के !!  मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज (blood sugar level ) स्तर बढा़ हूँआ मिलता है, यह रोग मरीजों के (रक्त मे गंदा कोलेस्ट्रॉल,)  के अवयव के बढने के कारण  होता है। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।  भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज हमारे रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। pancreas (अग्न्याशय) ग्लूकोज उत्पन्न करता है इनसुलिन भी रक्तधा...

बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं

 सबसे पहले आप हमेशा ये बात याद रखें कि शरीर मे सारी बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं  !  अब आप पूछेंगे ये वात-पित्त और कफ क्या होता है ???  बहुत ज्यादा गहराई मे जाने की जरूरत नहीं आप ऐसे समझे की सिर से लेकर छाती के बीच तक जितने रोग होते हैं वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं ! छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक जितने रोग होते हैं वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं !और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक जितने रोग होते हैं वो सब वात बिगड़ने के कारण होते हैं !  हमारे हाथ की कलाई मे ये वात-पित्त और कफ की तीन नाड़ियाँ होती हैं ! भारत मे ऐसे ऐसे नाड़ी विशेषज्ञ रहे हैं जो आपकी नाड़ी पकड़ कर ये बता दिया करते थे कि आपने एक सप्ताह पहले क्या खाया एक दिन पहले क्या खाया -दो पहले क्या खाया !! और नाड़ी पकड़ कर ही बता देते थे कि आपको क्या रोग है ! आजकल ऐसी बहुत ही कम मिलते हैं !  शायद आपके मन मे सवाल आए ये वात -पित्त कफ दिखने मे कैसे होते हैं ???  तो फिलहाल आप इतना जान लीजिये ! कफ और पित्त लगभग एक जैसे होते हैं ! आम भाषा मे नाक से ...
सभी मित्रों को नमस्कार, एवम् चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आरम्भ होने वाले नव विक्रम सम्वत् २०७१ की अग्रिम बधाई...!! मित्रों ३१ मार्च सोमवार को हमारा हिन्दू नव् वर्ष है यह जानकारी हमें पूरे देश में घर घर पहूँचानी है ज्यादा लोग ये जानते नहीं है औ र अंग्रेजी नव वर्ष को धूम धाम से मनाते हैं... 😀इस नव वर्ष पर हमें क्या करना चाहिए नीचे देखे :-- १ . इस दिन सुबह जल्दीे ही अपने परिवार के सभी सदस्य जग जाएँ २ . जल्दी स्नान कर यथा संभव नए वस्त्र पहनें . ३ . घर के मुख्य द्वार को फूलो से सजाएँ ४ . मंदिर , गोशाला जाकर प्रभु दर्शन और दान करे . ५ . अपने मित्रो ,परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारो के साथ मिलकर उत्सव मनाये और साथ मिलकर भोजन करे . ६ .आसपास गरीबो को भोजन कराएं एवं दान करें . ७ . अपने मोहल्ले और शहर को द्वारो को फूलों और बेनरो से सजाये . ८ . जगह जगह पर शरबत, निम्बू पानी आदि के स्टाल लगाये . ९ . नव वर्ष की जानकारी एवं नवरात्रों के अवसर पर सांस्कृतिक प्रोग्राम करे . १० . अपनी नयी पीढ़ी को अपने नूतन वर्ष के बारे में बताये . 🇮🇳 इस सन्देश को पूरे देश में ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहु...